Guru Ghasidas University: बिलासपुर सीयू में पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द… छात्र बोले- पहले रिपोर्ट हो सार्वजनिक

Guru Ghasidas University: बिलासपुर सीयू में पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द… छात्र बोले- पहले रिपोर्ट हो सार्वजनिक

बिलासपुर, 23 जुलाई। Guru Ghasidas University: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र लीक मामले ने बड़ा प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीए-एलएलबी छठवें सेमेस्टर की मई में आयोजित मुख्य परीक्षा को निरस्त करते हुए 27 जुलाई से पुनर्परीक्षा कराने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद छात्र-छात्राओं में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना दोबारा परीक्षा कराने का फैसला न्यायसंगत नहीं है।

जानकारी के अनुसार, बीए-एलएलबी छठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं 7 से 28 मई के बीच आयोजित हुई थीं। इसी दौरान समर्थ पोर्टल से प्रश्नपत्र और अन्य गोपनीय दस्तावेज बाहर आने की शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था, जिसने 6 जून को अपनी रिपोर्ट कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल को सौंप दी थी। करीब डेढ़ महीने बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा निरस्त कर नई समय-सारिणी जारी की है।

पुनर्परीक्षा के फैसले के विरोध में ला विभाग के विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रार प्रो. अश्वनी दीक्षित को ज्ञापन सौंपकर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। छात्रों का कहना है कि कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे बैच को नहीं मिलनी चाहिए।

जांच में यह बात सामने आई है कि समर्थ पोर्टल हैक नहीं हुआ था, बल्कि लॉगिन आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग के कारण प्रश्नपत्र और गोपनीय दस्तावेज लीक हुए थे। समिति ने मामले की पुलिस जांच कराने की भी अनुशंसा की है। इसके बाद विश्वविद्यालय ने विभागीय जांच समिति का गठन किया है।

इससे पहले प्रश्नपत्र लीक विवाद सामने आने के बाद ला विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. सुधांशु रंजन मोहापात्रा को उनके पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह इतिहास विभाग के प्रो. प्रवीण मिश्रा को नया विभागाध्यक्ष एवं डीन नियुक्त किया गया है। छात्रों ने पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रपति को भी भेजकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

विद्यार्थियों का कहना है कि जिस फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा निरस्त की गई है, उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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