Jhiram Ghati verdict: झीरम फैसले के बाद भूपेश बघेल का बड़ा बयान… NIA की जांच पर उठाए सवाल

Jhiram Ghati verdict: झीरम फैसले के बाद भूपेश बघेल का बड़ा बयान… NIA की जांच पर उठाए सवाल

रायपुर, 06 सितम्बर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने 2013 के इस मामले में सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषियों की सजा पर फैसला 16 सितंबर 2026 के लिए सुरक्षित रखा है। सुनवाई के दौरान कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

अदालत के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन झीरम घाटी मामले में जांच का दायरा सीमित रहा। उनके मुताबिक, बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका और हमले के पीछे कथित राजनीतिक षड्यंत्र की जांच पूरी तरह सामने नहीं आ सकी।

भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने इसी उद्देश्य से SIT का गठन किया था, ताकि हमले के पीछे की पूरी साजिश और जिम्मेदार लोगों का पता लगाया जा सके। उनका आरोप है कि NIA ने SIT की जांच को अदालतों में चुनौती दी और सरकार बदलने के बाद यह जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

25 मई 2013 को हुआ था हमला

झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कुल 29 लोगों की मौत हुई थी। 30 से अधिक लोग घायल भी हुए थे।

मामले की जांच बाद में NIA को सौंप दी गई थी। NIA ने सितंबर 2014 में चार्जशीट दाखिल की थी। अब 13 साल बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद मामले में सजा का इंतजार है। वहीं, राजनीतिक षड्यंत्र और हमले के पीछे बड़ी साजिश की जांच को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

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