केशकाल, 14 सितम्बर। Keshkal: छत्तीसगढ़ के केशकाल में आयोजित भादो जात्रा इस बार अपनी अनोखी परंपरा को लेकर चर्चा में है। जात्रा के दूसरे दिन परंपरा के अनुसार यहां ‘देवताओं की अदालत’ लगाई गई, जहां देवी-देवताओं और शक्तियों से जुड़े उन मामलों की सुनवाई हुई, जिन्हें समाज के लिए हानिकारक माना जाता है।
इस दौरान कुल 157 मामले अदालत में पेश किए गए। इनमें से 35 मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। स्थानीय मान्यता के अनुसार, कुछ मामलों में तत्काल फैसला नहीं किया जाता। ऐसे मामलों में संबंधित देवता को एक साल के लिए ‘रिमांड’ पर रखा जाता है। अगले साल भादो जात्रा के दौरान उस मामले की दोबारा सुनवाई होती है और परंपरा के अनुसार अंतिम फैसला सुनाया जाता है।
भादो जात्रा के मुख्य पुजारी सरजू राम गौर के मुताबिक, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। यहां होने वाले फैसले आधुनिक कानून के बजाय स्थानीय आदिवासी आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं।
इस अनोखी अदालत में आधुनिक न्याय व्यवस्था की तरह न तो न्यायाधीश होते हैं और न ही कानूनी धाराएं या औपचारिक अदालती प्रक्रिया। पूरी व्यवस्था लोकविश्वास और आदिवासी परंपराओं के अनुसार संचालित होती है।
केशकाल की भादो जात्रा की यही अनोखी परंपरा इसे खास बनाती है। इस आयोजन को देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचते हैं।


