Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला… पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को भी मिलेगी फैमिली पेंशन

Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला… पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को भी मिलेगी फैमिली पेंशन

बिलासपुर, 20 जुलाई। Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह भले ही हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध न माना जाए, लेकिन केवल इसी आधार पर दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के अधिकार से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कल्याणकारी प्रावधान हैं। इसलिए इन नियमों की व्याख्या संकीर्ण या तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि उदार और मानवीय दृष्टिकोण से की जानी चाहिए, ताकि आश्रित महिला को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

पहली पत्नी की मृत्यु के बाद बदल जाती है कानूनी स्थिति

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि पहली पत्नी का निधन हो चुका है, तो दूसरी पत्नी को केवल विवाह की तकनीकी वैधता के आधार पर पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य आश्रितों को संरक्षण देना है, न कि उन्हें आर्थिक संकट में धकेलना।

आश्रित महिलाओं को बड़ी राहत

हाई कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि पहली पत्नी के निधन की स्थिति में दूसरी पत्नी के पारिवारिक पेंशन संबंधी दावों का कानून के अनुरूप शीघ्र निपटारा किया जाए। माना जा रहा है कि इस फैसले से ऐसी अनेक महिलाओं को राहत मिलेगी, जो पति के निधन के बाद पारिवारिक पेंशन के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं।

 

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