मुंबई, 04 सितम्बर। Mirzapur The Movie: लंबे इंतजार के बाद ‘मिर्जापुर’ की दुनिया अब बड़े पर्दे पर पहुंच गई है। गुरमीत सिंह के निर्देशन और पुनीत कृष्णा की कहानी वाली ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ में वही पुराना पूर्वांचली अंदाज, दमदार डायलॉग, एक्शन और गद्दी की जंग देखने को मिलती है, लेकिन इस बार कहानी का दायरा पहले से बड़ा है।
फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैया के किरदार में नजर आ रहे हैं, जबकि दिव्येंदु मुन्ना भैया के रोल में वापसी करते हैं। अली फजल गुड्डू पंडित और जितेंद्र कुमार बबलू के किरदार में दिखाई देते हैं। वहीं रवि किशन की एंट्री कहानी में नया ट्विस्ट लेकर आती है। बब्बन बबुआ के किरदार में रवि किशन कालीन भैया और बाकी किरदारों के सामने नई चुनौती खड़ी करते हैं।
क्या है कहानी?
फिल्म की कहानी मिर्जापुर की गद्दी पर कब्जे की जंग के इर्द-गिर्द घूमती है। पुराने किरदारों के बीच इस बार नया खिलाड़ी बब्बन बबुआ उतरता है। मिर्जापुर से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक फैली यह जंग सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि चाल और रणनीति की भी है।
बीना भाभी का किरदार भी कहानी में अहम भूमिका निभाता है और कई मौकों पर कहानी की दिशा बदलता नजर आता है।
एक्शन और डायलॉग हैं फिल्म की ताकत
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका एक्शन और दमदार संवाद हैं। बड़े पर्दे और थिएटर के साउंड सिस्टम पर गोलियों और एक्शन सीन्स का असर और ज्यादा बढ़ जाता है। देसी ह्यूमर भी कहानी के बीच दर्शकों को मनोरंजन देता है।
जैसलमेर में फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस को खास तौर पर प्रभावी बताया गया है। सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म को बड़े पर्दे का अनुभव देने में कामयाब रहती है।
सेकंड हाफ में थोड़ी धीमी पड़ती है रफ्तार
फिल्म का पहला हिस्सा तेजी से आगे बढ़ता है और दर्शकों को बांधे रखता है। हालांकि इंटरवल के बाद कहानी कुछ समय के लिए धीमी पड़ जाती है। कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और यहां एडिटिंग थोड़ी और बेहतर हो सकती थी।
इसके बावजूद आखिरी करीब 30 मिनट में फिल्म दोबारा रफ्तार पकड़ती है और एक बड़े ट्विस्ट के साथ खत्म होती है। अंत से संकेत मिलता है कि ‘मिर्जापुर’ की कहानी अभी आगे भी बढ़ सकती है।
एक्टिंग में पंकज त्रिपाठी और रवि किशन का दम
कालीन भैया के किरदार में पंकज त्रिपाठी का ठहराव एक बार फिर प्रभाव छोड़ता है। मुन्ना भैया के रूप में दिव्येंदु की वापसी भी दर्शकों के लिए खास आकर्षण है। अली फजल ने गुड्डू पंडित के गुस्से और बदले की भावना को प्रभावी तरीके से पेश किया है।
वहीं रवि किशन फिल्म के बड़े सरप्राइज में से एक हैं। बब्बन बबुआ के किरदार में उनका देसी अंदाज और दबंग व्यक्तित्व फिल्म में नई ऊर्जा लेकर आता है। जितेंद्र कुमार और रसिका दुग्गल समेत बाकी कलाकारों का काम भी कहानी को मजबूत बनाता है।
कैसी है फिल्म?
कुल मिलाकर, ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ उन दर्शकों को ज्यादा पसंद आ सकती है जो पहले से इस फ्रेंचाइजी के किरदारों और अंदाज से परिचित हैं। फिल्म में एक्शन, क्राइम, देसी डायलॉग और ह्यूमर का भरपूर इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि सेकंड हाफ की धीमी रफ्तार कुछ दर्शकों को खल सकती है, लेकिन दमदार क्लाइमैक्स और कलाकारों की एक्टिंग फिल्म को संभाल लेती है। बड़े पर्दे पर ‘मिर्जापुर’ के भौकाल को देखने के शौकीन दर्शकों के लिए यह फिल्म एक अलग सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश करती है।


